विद्युत क्षेत्र

विद्युत क्षेत्र

प्रत्येक आवेश अपने चारों ओर एक निश्चित क्षेत्र उत्पत्र करता है। यदि एक आवेश \displaystyle {{Q}_{1}} इसके नजदीक स्थित एक अन्य आवेश \displaystyle {{Q}_{2}} पर बल आरोपित करता है तो यह कहा जा सकता है कि \displaystyle {{Q}_{2}}\displaystyle {{Q}_{1}} के क्षेत्र में रखा हुआ है इसलिए यह बल का अनुभव करता है या
Q1, Q2 के क्षेत्र में रखा है इसलिए यह बल का अनुभव करता है इस प्रकार एक आवेश के चारों ओर वह क्षेत्र, जिसमें कोई अन्य आवेश बल का अनुभव करता है, विद्युत क्षेत्र कहलाता है।

विद्युत क्षेत्र की तीव्रता \displaystyle (\vec{E}): विद्युत क्षेत्र में किसी बिन्दु पर स्थित एकांक धन_आवेश जितने बल का अनुभव करता है उसे उस बिन्दु पर विद्युत क्षेत्र की तीव्रता कहते हैं। \displaystyle \vec{E}=  \frac{{\vec{F}}}{{{q}_{0}}}


जहाँ \displaystyle {{q}_{0}}\to 0 ताकि इस आवेश की उपस्थिति आवेश स्त्रोत Q को प्रभावित न करे और इसके विद्युत क्षेत्र में कोई परिर्वतन न हो इसलिए विद्युत क्षेत्र की तीव्रता के लिए सही व्यंजक इस प्रकार है \displaystyle \vec{E}=\underset{{{q}_{0}}\to 0}{\mathop{Lim}}\,\,\,\,\frac{{\vec{F}}}{{{q}_{0}}}


मात्रक एवं विमीय सूत्र : SI मात्रक एवं CGS मात्रक

विमाएँ [\displaystyle E] =[\displaystyle ML{{T}^{-3}}{{A}^{-1}}]

विद्युत क्षेत्र की दिशा : विद्युत क्षेत्र (तीव्रता){ \displaystyle \vec{E} एक सदिश राशि है। धनावेश के कारण विद्युत क्षेत्र की दिशा सदैव आवेश से दूर की ओर एवं रुणावेश के कारण आवेश की ओर होती है।


विद्युत बल एवं विद्युत क्षेत्र में सम्बन्ध : विद्युत क्षेत्र \displaystyle \vec{E} में रखा एक आवेश ; (Q), \displaystyle F=QE बल का अनुभव करता है। यदि आवेश धनात्मक है तो बल की दिशा विद्युत क्षेत्र की दिशा में होती है और यदि रुणात्मक है तो बल की दिशा विद्युत क्षेत्र की विपरीत दिशा में होती है।


विद्युत क्षेत्र का अध्यारोपण (कई आवेशों के कारण किसी एक बिन्दु पर विद्युत क्षेत्र): कई आवेशों के कारण किसी एक बिन्दु पर परिणामी विद्युत क्षेत्र, प्रत्येक आवेश के कारण उस बिन्दु पर उत्पत्र विद्युत क्षेत्र के सदिश योग के तुल्य होता है।

  \displaystyle \vec{E}={{\vec{E}}_{1}}+{{\vec{E}}_{2}}+{{\vec{E}}_{3}}+...

 दो विद्युत क्षेत्रों के परिणामी विद्युत क्षेत्र का परिमाण


  \displaystyle E=\sqrt{E_{1}^{2}+E_{2}^{2}+2{{E}_{1}}{{E}_{2}}\cos \theta } एवं दिशा \displaystyle \tan \alpha =\frac{{{E}_{2}}\sin \theta }{{{E}_{1}}+{{E}_{2}}\cos \theta }

सतत एवं एकसमान आवेश वितरण के कारण विद्युत क्षेत्र : इस प्रकार के वितरण में कई आवेश एक निश्चित अल्प दूरी पर व्यवस्थित होते हैं।

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